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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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#AwareAdiYo  32% एस.टी. आरक्षण पर संकट का विवाद क्या मामला है? छत्तीसगढ (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण अधिनियम) (1994 का क्र. 21) में संशोधन अधिनियम 2011 के प्रकरण में 14 जून को हाई कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि सभी अधिवक्ता 12 जुलाई के सप्ताह में आखिरी जिरह करें| सतनामी संगठनों ने इसको हाई कोर्ट बिलासपुर में चुनौती दे रखी है (गुरु घासीदास साहित्य एवं सांस्कृतिक संस्थान, रायपुर बनाम छग. राज्य, WP-C. 591/2012)| सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ के 5 मई के मराठा आरक्षण फ़ैसले के बाद छत्तीसगढ के संशोधन अधिनियम 2011 का निरस्त होना तय माना जा रहा है| पिछली सुनवाई तारीख का आदेश और जीएडी का जो डॉकुमेंट शेयर किया गया है उसमें विवरण देखिए| आधिकारिक वेबसाईट पर भी देख सकते हैं| इस प्रकरण के पीछे की कथा: छत्तीसगढ राज्य बनने के बाद भी आदिवासियों को नौकरी में आरक्षण का पूरा हक नहीं मिला| मध्य प्रदेश की आरक्षण व्यवस्था ही जारी रखी गई| 2003 से प्रमोशन में 23% एस.टी. आरक्षण का प्रावधान हुआ लेकिन 2012 तक भर्ती में सिर्फ़ 18 या 20% ही आरक्षण मिलता रहा| आरक्षण अधिनियम 1994...

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#AwareAdiYo  जागो, जागो, जागो आदिवासी युवा कर्मचारी अधिकारी नींद से जागो। जितने भी आदिवासी समाज के नौकरी करने वाले हमारे भाई /बहन है। जो 16/3/2012 से सरकारी नौकरी में आए है।  उनके लिए बुरी खबर है। जिस शर्त पे आप नौकरी कर रहे हो 32% आरक्षण ले के उसका  12 जुलाई के सप्ताह में आखिरी सुनवाई होकर जजमेंट आना है।   नौकरी बचाने का अग्रिम तैयारी   करे। जितने भी 2012 के बाद वाले आदिवासी नौकरी में लगे है। उनके नियुक्तिपत्र प्वाइंट नंबर 2 पर  यह बात स्पष्ट लिखी गई है। छत्तीसगढ़ शासन सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 13-14/2009 आ. प्र/1-3 रायपुर दिनांक  16 /3/2012 अनुसार की जाने वाली नियुक्तियां माननीय उच्च न्यायालय द्वारा याचिका क्रमांक रिट पीटी.(सी.) 591/2012 याचिका क्रमांक रिट पीटी.(सी.) 592/2012 याचिका क्रमांक रिट पीटी.(सी.)593/2012 याचिका क्रमांक रिट पिटि.(सी.)594/2012 में पारित होने वाले आदेश/ निर्णय के अध्यधीन रहेगी। आओ एक साथ मिलकर 2012 से अब तक के सभी आदिवासियों का नौकरी बचाए। योगेश कुमार ठाकुर अध्यक्ष आदिवासी छात्र संगठन संपर्क  -...

आदिवासी छात्र संगठन

#AwareAdiYo  राज्य बनने के बाद  सन 2000 से 2012 तक आदिवासियो को उनका अधिकार नही मिला,  जब मिला उसको भी कोर्ट में एससी वर्ग के लोगो द्वारा चैलेंज किया गया। कुछ लोग बोलेंगे वो अपना 16% कराने गए है। भाई जनसंख्या कितना है 12.6% उनको 16% दिया ही नही जा सकता किंतु मात्र (.6%) के लिय पूरा आरक्षण को खतरे  में डाल दिया गया। सोचने वाली बात है।  क्या अब आदिवासी समाज अपना 32% आरक्षण बचाएगा।  या केवल आदिवासी संगठन पत्र लिखेगा, बहाना बनाएगा। आदिवासी समाज के मुंह पे तमाचा है ये क्या करेंगे आप? योगेश कुमार ठाकुर         अध्यक्ष आदिवासी छात्र संगठन     9617154696

आदिवासी छात्र संगठन

राज्य बनने के बाद  सन 2000 से 2012 तक आदिवासियो को उनका अधिकार नही मिला,  जब मिला उसको भी कोर्ट में एससी वर्ग के लोगो द्वारा चैलेंज किया गया। कुछ लोग बोलेंगे वो अपना 16% कराने गए है। भाई जनसंख्या कितना है 12.6% उनको 16% दिया ही नही जा सकता किंतु मात्र (.6%) के लिय पूरा आरक्षण को खतरे  में डाल दिया गया। सोचने वाली बात है।  क्या अब आदिवासी समाज अपना 32% आरक्षण बचाएगा।  या केवल आदिवासी संगठन पत्र लिखेगा, बहाना बनाएगा। आदिवासी समाज के मुंह पे तमाचा है ये क्या करेंगे आप? योगेश कुमार ठाकुर         अध्यक्ष आदिवासी छात्र संगठन     9617154696

आदिवासी छात्र संगठन

#AwareAdiYo  प्रमोशन के विषय में ना जनजाति कर्मचारी संगठन सही बात बोलना चाहता है। ना सर्व आदिवासी समाज संगठन  रुचि ले रहा है घाटा आदिवासी समाज का हो रहा है।   जब से ये मामला हमारे पास आया लगातार इनके कानूनी  पहलुओं में लिखा।  किन्तु कर्मचारी संगठन ने कोई रुचि नहीं ली।  बल्कि संगठन के पदाधिकारियो ने 13% और 32%  लिख कर गजट में प्रकाशित कराया जो कोर्ट में स्टे लग गया।  अब सब ट्वीट  ट्वीट खेल रहे है। हद तो तब हो जाता है। आज आदिवासी समाज के दो ग्रुप मुख्यमंत्री से मिले किंतु इस विषय का कही चर्चा नही है।  आप खुद सोचिए 2019 को प्रमोशन का मामला खारिज हुआ।  लगातार लिखने के बाद कमिटी बना वो भी फर्जी।  ओबीसी का कमिटी में जोड़ना ही नही था। कारण प्रमोशन का मामला   एसटी/एससी का है। जब हमने आगाह किया डिमोशन का खतरा है।  उसके बाद भी दोनों संगठन चुप रहे और आरोप लगाने से भी बाज नही आए।  यहां तक कह दिए की समाज को तुम गुमराह कर रहे हो।  ऐसे लोगो को समाज से माफी मांगना चाहिए।  ये लोग समाज का नुकसान किए।  आज जो आदि...

आदिवासी छात्रसंगठन छत्तीसगढ़

जो लोग ढाई साल बेमिसाल बोल रहे है उनको खुला चैलेंज।  आदिवासियो के साथ ऐतिहासिक अन्याय किया गया --  1. सिलगेर कांड 2.फर्जी आदिवासियों को संरक्षण 3. आदिवासियो कर्मचारी अधिकारियों को प्रमोशन नही दिया गया। 4.आदिवासी छात्रों को छात्र वृत्ति नही दे पाए। 5.पखांजूर के बागलादेशी पहले आदिवासियो के लिए समस्या था, उनको उनके देश भेजने की बात कर रहे थे। किए क्या  6.आदिवासियो को सबसे पहले जंगल में अधिकार दिए क्या 7.आदिवासियो का जमीन गलत तरीके से गैर आदिवासियो को आज भी बेचा जा रहा है। 8.आज भी आदिवासी बच्चों के। शिक्षा के लिय कोई ठोस काम नही हुआ  9.आदिवासी लड़कियों को बहला फुसला कर उनसे शादी कर  गैर आदिवासी जमीन खरीद रहे है, उनको चुनाव लडा रहे है। 10. IAS रहे चंद्रकांत उइके जी के परिवार को दो साल हो गया अनुकम्पा भी नही दे पाए। और कितनी बात बताऊं आदिवासी हित में एक भी काम नहीं हुआ  आदिवासी स्टूडेंट, आदिवासी कर्मचारी और आदिवासी किसान सभी के साथ शोषण ही हुआ है। टिप :- आदिवासी युवा से खास अपील एसएमएस को कम से कम 10 बार  शेयर करे अपने लोगो तक बात पहुंचाए ।  जय सेवा,...

जय आदिवासी,जय जोहार,जय प्रकृति देव

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बहुत ही चालाकी से सत्ता और प्रशासन में बैठे पूजीपति/उद्योगपति और उनके संबंधियों ने जल,जंगल और जमीन के मालिक आदिवासियों और सेना को आमने सामने कर दिया। इन उद्योगपति की जंगल और जमीन के अंदर की संपदा और संसाधन पर कई दसको से नजर से रही है और समय समय पर उनका अनियंत्रित दोहन किया है और इस दोहन में उसका सबसे बड़ा बाधक रहा है आदिवासी । चुकी पांचवी अनुसूची ने इन पूजीपती के हाथ बाध रखा है। और इस बंदिश को ये सेना के माध्यम से खोलने की कोशिश कर रहे है। सेना और पुलिस का हस्तक्षेप इस खेल का शुरुआत है । पहले सेना के कैंप को स्थापित किया जाएगा फिर वो अपने लोग को आदिवासी की पोशाक में सेना पर हमला करवाएंगे तदुपरांत निर्दोष आदिवासीओ को नक्सली और माओवादी घोषित करके उनका बलपूर्वक दमन कराएंगे। इस खून खराबे में आदिवासी जंगल को छोड़ने को मजबूर होंगे और इसके बाद इन पूजीपतियो को लूट मचाने को खुली छूट मिल जायेगी । ये लोग खुद की कंपनी लगाएंगे और वहा के आदिवासियों को उनकी ही जमीन पर किरायेदार बना देंगे उसके बाद नौकर। याद रखिए आधिवासियो की जमीन ही उनका आधार है यदि उनकी जमीन चली गई तो उनसे CAA/NRC का हवाल...

आदिवासी छात्रसंगठन छत्तीसगढ़

बस्तर जीतेगा,जंगल बचेगा,आदिवासी रहेंगे,जीव जंतु जिएंगे। जल जंगल जमीन को बचाने वाले, सुरक्षित रखने वाले, अपनी जान तक न्यौछावर करने वाले, आंदोलनरत सभी भाई बहनों सेवा जोहार..... #जोहार_आदिवासी #प्रकृति_की_सेवा_जोहार प्रकृति - पेड़-पौधे जीव जंतुओं ने इतने दिनों से हमारी सेवा  करते आएं हैं, अब हम उन्हें सुरक्षित और संरक्षित रखकर उनकी सेवा करेंगे। रविन्द्र कुमार अमिले  संपर्क- 8225061946 आदिवासी छात्र संगठन (ASU) छत्तीसगढ़ tribleunion.blogspot.com https://twitter.com/Ravindr40882818/status/1403278482344321026?s=19                        

बस्तर में खुनी खेल बंद हो

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  https://youtube.com/shorts/JInBXmFgyR8?feature=share बस्तर में खुनी खेल बंद करो, नक्सली के नाम पर  बेकसुर आदिवासीयों की हत्या करना बंद करो | दिनांक 27 मई को सर्व आदिवासी समाज, युवा प्रभाग- जिला - बालोद (छ. ग.) और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना बालोद के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के सुकमा और बीजापुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र मे पुलिस कैम्प खोले जाने का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हज़ारों ग्रामीणों की भीड़ पर पुलिस द्वारा अचानक ही गोलीबारी किया गया इस नरसंहार में 3 ग्रामीणों की मौत और 50 से अधिक ग्रामीणों मौके वारदात में घायल हो गए, जिस पर आज सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, जिला- बालोद (छ. ग.) के द्वारा उच्चस्तरीय जाँच के लिए व दोषियों पर FIR दर्ज कर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने के संबंध में महामहिम राष्ट्रपति (भारत)और राज्यपाल छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन दिया गया, जिसमे जिला पदाधिकारी सदस्य :- नीरज - ठाकुर (जिलाध्यक्ष-युवा प्रभाग), प्रेम लाल कुंजाम, शेखर भुआर्य, खेमराज पिस्दा, चोवा कतलाम, गमान ठाकर, यसवंत गोर एवं समस्त जन प्रतिनिधि मौजूद थे |

आदिवासी छात्रसंगठन छत्तीसगढ़

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  आदिवासी ‌छात्रसंगठन छत्तीसगढ़ 👇👇 https://kutumb.app/adivasi-chatrasangthan-chhattisgarh?ref=JYF85 जय जोहार

बस्तर में खुनी खेल बंद हो

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 आज पूरे छत्तीसगढ़ में बस्तर में हो रही हिंसा के विरोध में अपने अपने घर से ही लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे है। दुर्भाग्य है इतने बड़े प्रदर्शन को मीडिया दिखा नही रही है। क्योंकि इस मीडिया का बाप ही झोला छाप चौकीदार चोर है, बस्तर की घटना से पूरा छत्तीसगढ़ के लोगो मे रोश देखा जा रहा है | आदिवासी समुदाय को नक्सली घोषित करके गोली मारकर हत्या करना आसान है, सरकार काश आपने आदिवासीयों को उनके वास्तविक मांग को सुना होता तो निर्दोष लोग नहीं मरते, शासन प्रशासन को तो शर्म आनी चाहिए कि भोले-भाले आदिवासियों को नक्सलियों के नाम से फर्जी एनकाउंटर कर रहे हैं । जंगलो की जान है "आदिवासी" प्रकृती की पहचान है" आदिवासी" सरलता है जीवन की विशेषता जटीलता से अनजान है" आदिवासी" वह जिते है अपने अंदाज मे संस्कृती की आन है"आदिवासी

आदिवासी छात्रसंगन छत्तीसगढ़

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दिनांक-09/06/2021 दिन-बुधवार को(ASU) https://twitter.com/Ravindr40882818/status/1403272974510166020?s=19 आदिवासी छात्र संगठन राजनांदगांव के आदिवासी छात्रों द्वारा बस्तर सिलेगर मामले को लेकर राज्यपाल के नाम  ज्ञापन सौंपा गया । जिसमें आदिवासी छात्र संगठन के संयोजक-रोहीत बढ़ाई,रविन्द्र कुमार अमिले,खेमलाल भुआर्य व मंजित आचले सहित अन्य समस्त छात्रप्रतिनिधि शामिल थे !