आदिवासी छात्र संगठन

#AwareAdiYo 
प्रमोशन के विषय में ना जनजाति कर्मचारी संगठन सही बात बोलना चाहता है।
ना सर्व आदिवासी समाज संगठन  रुचि ले रहा है घाटा आदिवासी समाज का हो रहा है।
  जब से ये मामला हमारे पास आया लगातार इनके कानूनी  पहलुओं में लिखा।
 किन्तु कर्मचारी संगठन ने कोई रुचि नहीं ली।
 बल्कि संगठन के पदाधिकारियो ने 13% और 32%  लिख कर गजट में प्रकाशित कराया जो कोर्ट में स्टे लग गया।
 अब सब ट्वीट  ट्वीट खेल रहे है। हद तो तब हो जाता है।
आज आदिवासी समाज के दो ग्रुप मुख्यमंत्री से मिले किंतु इस विषय का कही चर्चा नही है।
 आप खुद सोचिए 2019 को प्रमोशन का मामला खारिज हुआ।
 लगातार लिखने के बाद कमिटी बना वो भी फर्जी।
 ओबीसी का कमिटी में जोड़ना ही नही था।
कारण प्रमोशन का मामला 
 एसटी/एससी का है।
जब हमने आगाह किया डिमोशन का खतरा है।
 उसके बाद भी दोनों संगठन चुप रहे और आरोप लगाने से भी बाज नही आए।
 यहां तक कह दिए की समाज को तुम गुमराह कर रहे हो।
 ऐसे लोगो को समाज से माफी मांगना चाहिए।
 ये लोग समाज का नुकसान किए।
 आज जो आदिवासी कर्मचारियों के
ऊपर खतरा है।
 इन लोगो के ना समझी की वजह से है।
और घमंड के वजह से है।
उन कर्मचारी साथियों  को भी कहना चाहूंगा की अपने अधिकार के लिय सजग रहे।
 किसी संगठन का भक्त बनने से अपने और आने वाली पीढ़ी का नुकसान ही होगा और हो रहा है।
एक बात और जब up और अन्य राज्य में प्रमोशन खतम हो गया तो यहां किस बात का अकड़ है। उन राज्यों में ऐसा ही अकड़ था उनका अकड़ और प्रमोशन दोनों खत्म हो गया।
बल्कि वहा के लोग इन मामलों में ज्यादा ताकत दिखाए।
 इससे हमे सबक लेना चाहिए और नया व सही  नियम बनाने में ज्यादा जोर देना चाहिए।
जिससे कोर्ट में  चैलेंज भी ना हो और अभी भी यदि नियम को सही बना लिया गया तो कोर्ट में वैसे भी मामला नही चलेगा।
कोर्ट को बता दिया जाएगा की नियम सुधार  लिया गया है।

 यहां तो प्रमोशन मामले को कर्मचारी संगठन अपने संगठन का मामला समझ रहा है।
 यह उनके संगठन का मामला नही है। समाज का मामला है।
छुप- छुप कर  बैठक करने और ऑनलाइन बैठक से हटाने से समस्या। हल नही होगा।
 भला इतना डर किस बात का है।

रही बात ज्ञापन का तो बहुत पहले हम इस मुहिम में ज्ञापन राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम से दे चुके है इस विषय में। 
सही समय में  सही बात ना बोल कर कर्मचारी संगठन और सर्व आदिवासी समाज  संगठन ने समाज को खतरे में डाला है।
आज जब पोल खुल गया।
 सभी तरफ से दबाव आया तो
 अपनी - अपनी शाख बचाने के लिय एक दिन का वेतन दो लड़ेंगे कह रहे है। फर्जी आदिवासी विषय में भी मुंह में दही जमाए बैठे है।
फर्जी हटेंगे तो समाज का ही फायदा होना है। आज की फर्जी हटाओ मुहिम में कितने कर्मचारी  या संगठन  साथ है  रुख  साफ करना चाहिए।
 समाज को गुमराह कर राजनीतिक पार्टियों से दलाली कर समाज का नुकसान करने वालो को  नही बक्सा जायेगा लगातार उनलोगो के खिलाफ लिखा जायेगा, बोला जायेगा।

योगेश कुमार ठाकुर
       अध्यक्ष
आदिवासी छात्र संगठन
 9617154696

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