जय आदिवासी,जय जोहार,जय प्रकृति देव
बहुत ही चालाकी से सत्ता और प्रशासन में बैठे पूजीपति/उद्योगपति और उनके संबंधियों ने जल,जंगल और जमीन के मालिक आदिवासियों और सेना को आमने सामने कर दिया।
इन उद्योगपति की जंगल और जमीन के अंदर की संपदा और संसाधन पर कई दसको से नजर से रही है और समय समय पर उनका अनियंत्रित दोहन किया है और इस दोहन में उसका सबसे बड़ा बाधक रहा है आदिवासी ।
चुकी पांचवी अनुसूची ने इन पूजीपती के हाथ बाध रखा है। और इस बंदिश को ये सेना के माध्यम से खोलने की कोशिश कर रहे है।
सेना और पुलिस का हस्तक्षेप इस खेल का शुरुआत है ।
पहले सेना के कैंप को स्थापित किया जाएगा फिर वो अपने लोग को आदिवासी की पोशाक में सेना पर हमला करवाएंगे तदुपरांत निर्दोष आदिवासीओ को नक्सली और माओवादी घोषित करके उनका बलपूर्वक दमन कराएंगे। इस खून खराबे में आदिवासी जंगल को छोड़ने को मजबूर होंगे और इसके बाद इन पूजीपतियो को लूट मचाने को खुली छूट मिल जायेगी । ये लोग खुद की कंपनी लगाएंगे और वहा के आदिवासियों को उनकी ही जमीन पर किरायेदार बना देंगे उसके बाद नौकर।
याद रखिए आधिवासियो की जमीन ही उनका आधार है यदि उनकी जमीन चली गई तो उनसे CAA/NRC का हवाला देकर कागज मांगा जाएगा फिर उन्हे शरणार्थी घोषित करके भगाया जाएगा।
सेवा जोहार🙏🙏🙏
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