एक रियासत परलकोट - कृष्णपाल राणा ज्ञानदीप

🌹🌹 एक रियासत परलकोट 🌹🌹
एक रियासत परलकोट थी
चांदा तक वह फैली थी
बस्तर रियासत की संगिनी थी
जन जन की अभिमानी थी
गैंदसिंह बाऊ भूमिया राजा
परलकोट की शान थे
भुखे को भोजन कराते
अन्न आभूषण दान करते
लोगों की सुरक्षा करते
समरसता की भाव जगाते
सन 1824 में बुरी नजर लगी थी
अंग्रेजों और मराठों ने परलकोट को छीनी थी
गुलामी की जंजीरों को तोड़ने
जंग कि ऐलान किया
गैंदसिंह बाऊ ने परलकोट की
रखवाली सीना तान किया
अबूझमाड़िया सेना लेकर
गैंदसिंह यलगार किए
धावड़ा टहनी का राह दिखाकर
लोगों को संदेश दिया
अबूझमाड़ की अबूझ सेना
मधु मक्खी की जैविक सेना
तीर भाला से जंग लड़े
अंग्रेजों मराठों के छक्के छुड़ाए
आधुनिक हथियारों से
अंग्रेज मराठों ने भीषण रण में
परलकोट को घेर लिया
10 जनवरी सन् 1825 को
गैंदसिंह को पकड़ लिया
20 जनवरी 1825 को
महल के सामने फांसी दिए
तब असहाय हुए परलकोट के जन
ऐसे में रमोतीन समरथ
युद्ध की थामी कमान
एक सप्ताह खुनी रण में
अंग्रेजों के मांद में
हुई भीषण रण, टूटी रमोतीन
वीरगति को पाई रमोतीन
एक रियासत परलकोट थी
चांदा तक वह फैली थी
बस्तर रियासत की संगिनी थी
जन जन की अभिमानी थी।

    कृष्णपाल राणा  ज्ञानदीप
बारदा ( पखांजूर ) परलकोट जिला उत्तर बस्तर कांकेर छत्तीसगढ़

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