मूर्ति पूजा और पाखंडो को समझे और इस अन्धविश्वास , पाखंडवाद को ख़त्म करे ।
मूर्ति पूजा और पाखंडो को समझे और इस अन्धविश्वास , पाखंडवाद को ख़त्म करे ।
अमित मंदिर में पूजा करने गया जब बाहर आया तो एक भिखारी ने उससे भीख माँगी ।
अमित ने उसको दुत्कार दिया
भिखारी से अपमान सहन नही हुआ ।
उसने अमित से पूछा - मंदिर क्यों आते हो ?
अमित : पूजा करने ?
पूजा किसलिए करते हो ?
अमित : अपने घर की सुख समृद्धि के लिए अपने कारोबार और परिवार के लिए समृद्धि माँगता हूँ ।
भिखारी : हम क्या यहाँ बैठकर झख मारते हैं ?
रोज 10 - 12 घंटे माँगते हैं यहाँ और जब से पैदा हुए हैं तब से माँग रहे हैं लेकिन आज तक भिखारी ही हैं ।
तू क्या समझता है दस पंद्रह मिनट को आकर तू अपनी इच्छापूरी करवा लेगा ?
अबे जब हम जन्म से मांग रहे हैं और अब तक भी भिखारी हैं....
हमको इन्होने कुछ नही दिया तो तुझको क्या देगा ?
हमसे दीन हीन और कौन होगा?
अगर इसको किसी पर दया दिखानी थी ..
तो हम पर दिखानी थी ..
जब हमको ही कुछ नही दिया तो तुझको क्या देगा ?
………जबकि तेरे पास तो कुछ कमी नही है ...
गाड़ी बंगले कार सब कुछ है ।
एक बात समझ ले ...इन्सान ही इंसान के काम आता है ...इसीलिए हम मंदिर के बाहर बैठकर भी.. भगवान के नाम पर जरुर मांगते हैं लेकिन भगवान से नही माँगते इंसान से ही माँगते हैं ।
आप सभी से निवेदन है कि खुद जागें 🙏और अपने समाज को जगाने में सहायता करे...💪
मूर्ति पूजा और पाखंडो को समझे और इस अन्धविश्वास , पाखंडवाद को ख़त्म करे ।
आज देख लीजिये जिस देश में अंधविश्वास नहीं है वो हमसे बहुत आगे है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें