हमारी बिरादरी का *हल्बा* नामकरण कैसे हुआ??

हमारी बिरादरी का  *हल्बा* नामकरण कैसे हुआ??
1//कुछ लोग "हल" और "बाहना" से हलबा बताते हैं लेकिन यह हमारी नियमावली पत्रिका में कहीं भी नहीं लिखा है। यदि  इसका कोई वाजिब आधार होता और सही होता तो जरूर लिखा होता।
2//"हल" हिंदी भाषा का शब्द है और "बाहना" छत्तीसगढ़ी का शब्द है।।
3//हल से हलबा हो ही नहीं सकता क्योंकि हलबी और छत्तीसगढ़ी में भी हल शब्द नहीं है उसके लिए *नांगर* है।
4//कोई समुदाय का नामकरण उनकी अपनी भाषा बोली में होता है ना कि दूसरों की भाषा बोली में..... यदि हल्बी में होता तो नांगर धारण करने वाले बिरादरी का  *नांगरिहा* नामकरण होता।।
5//तो सवाल उठता है कि आखिर हलबा नामकरण कैसे  हुआ होगा?.........
6//मेरी जानकारी के अनुसार  भतरा आदिवासीयों की बोली भतरी से ही हलबा  शब्द की उत्पत्ति  हुई है।
भतरी में खेत की चौकीदारी/ रखवाली करने के काम को "हालीबाटा करना" कहते हैं।।
 इसी हालिबाटा शब्द से हलबा नामकरण हुआ है।।
भतरी को  हल्बी की बहन मानने में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि दोनों ही आदिवासी भाषा परिवार से हैं।
हालिबाटा करना अर्थात खेत में फसलों की रक्षा करना। उस जमाने में  जब नील गाय,हाथी,जंगली भैंसा आदि खेतों के फसल को नुकसान पहुंचा सकते थे,,और शाकाहारी जानवरों के आवागमन बने रहने से शेर बाघ चिता जैसे मांसाहारी खूंखार जानवर भी वहां आस पास अपने शिकार के लिए घात लगाए बैठे होते तब  खेतों की रक्षा के लिए  आज के जैसे कोई   उन्नत हथियारो का आविष्कार  भी नही हुआ था,, और  आज के जैसे लोकतांत्रिक संविधानिक नियम कायदा कानून  भी नहीं था ,,धन दौलत के नाम पर मात्र पशु धन और खेतों में होने वाली अन्न धन  ही सबसे बड़ा धन होता था,,
  और लोग  अलग अलग कबीलों में रहकर एक दूसरे के संपत्ति अन्न धन,, गोधन,, आदि का लूटमार भी करते होंगे,,जिनकी लाठी उनकी भैस वाली कहावत 100%चरितार्थ होती थी,, जंगलों में जब डाकू लुटेरे रहते होंगे  ऐसे अविकसित समाज में अवश्य ही हालीबाटा का काम आसान काम नहीं रहा होगा,, क्योंकि इसके लिए बलिष्ठ,, साहसी,, कर्तव्य परायण,, जिम्मेदार लोगों की आवश्यकता होती है।
और हलबाओं द्वारा गोंडवाना भू भाग में अपने सामूहिक खेती की  फसल,,पशुधन,गांव ,और बहु बेटी की रक्षा करना अर्थात हालिबाटा करना ....इस कार्य से हलबा नामकरण बहुत ज्यादा उचित लगता है .......और तर्क संगत भी प्रतीत होता है।।।
ये अलग बात है कि जो खेत की रखवाली /रक्षा करेगा वो खेती भी अच्छे से करेगा .... हलबा खेती बाड़ी करने वाली बिरादरी ही है।अपने 
भाषा बोली की जानकारी होना आदिवासी के लिए निहायत ही जरूरी है ,,अन्यथा बोगस आदिवासी भी हो सकते हैं।इसलिए  अपने समुदाय की भाषा हलबी को जानिए सीखिए समझिए ......इसके लिए पुस्तक भी उपलब्ध है।।
आप सभी सगा जनों के विचार आमंत्रित है ......

(के.के.पिद्दा 6261739896)

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