दिवाली में दिवाला...

 *दिवाली में दिवाला...*

धन तेरस के दिन तेरा सारा धन,

           *तेरा(बनिया का)* हो जाता है...

*जागो और जगाओ आडम्बर भगाओ...*

पानी बादल धूप छांव में,
         तपती गर्मी भूख प्यास में,
                      किसान अन्न उपजाता हैं..!!
ब्राह्मण बनिया के चक्कर में,
                  धन तेरस के फेरे में,
                            शुभ अशुभ के घेरे  में,              
सोना चांदी, पीतल, तांबा,
                  खरीद के घर लाता  हैं..!
लक्ष्मी पाने के चक्कर मे,
          घर की लक्ष्मी बनिया को दे आता है..!!
धन तेरस को तेरा सारा धन,
                तेरा (बनिया का) हो जाता है..!!
वाह रे धन तेरस,
             तेरी गज़ब करिश्मा है..!
कमाने वाला ठगा जाता है,
       ठगने वालों की महिमा है..!!
खाली हाथ किसान भाई,
            नरक चतुर्दशी मनाता है..!
मौज उड़ाता ब्राह्मण बनिया,
                छप्पन भोग उड़ाता है..!!     
दिवाली में दिवाला निकालकर,
       साल भर रोता और पछताता है..!!

       🐂🐄🐃🌹🙏🌹🐃🐄🐂

देव + आरी = देवारी (ईशर गवरा और गांव के देवी देवताओं की आराधना)

आओ देवारी मनाएं...!
समाज में एकता का दीप जलाएं..!!
ईशर गौरा का व्याह रचाएं..!
दैविक शक्ति को जगाएं..!!
आओ देवारी मनाएं..
गो रूपी धन को खिचड़ी खिलाएं..!
ख़ुद खाये औरों को भी खिलाएं..!!
आडम्बर को दूर भगाएं..!
आओ देवारी मनाए.....
आओ देवारी मनाए....!!

               ✍ठाकुर विष्णुदेव सिंह पडोटी
                              राष्ट्रीय प्रवक्ता
                    केन्द्रीय गोंड़वाना, महासभा

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