आदिवासियो के महत्वपूर्ण मुद्दे :-

प्रिय साथियों जैसे की आप सभी  जानते है की आज से आदिवासी नृत्य महोत्सव साइंस कॉलेज मैदान रायपुर में आयोजित है जिसमे हमे किस बात से आपत्ति है जानने से पहले यह बात समझ ले कोई भी व्यक्ति कब नाचता है स्वाभाविक बात है खुशी में नाचता है,कुछ अच्छा होने पर नाचता गाता है।
हम  वही बात जानना चाहते है की आदिवासी किस बात की खुशी में नाचे ?
आदिवासियो के महत्वपूर्ण  मुद्दे :-
1. 32% आरक्षण पर लोगो ने चालाकी से हमला किया।
2. प्रमोशन में आरक्षण का नियम बनाना राज्य सरकार का काम है जिसे  राज्य सरकार ने अभी तक नही किया लगभग  दो  साल से आदिवासी कर्मचारी अधिकारी भटक रहे है।
3. फर्जी आदिवासियो को नौकरी से निकालना चाहिए उनके ऊपर विधिक कार्यवाही होना चाहिए उल्टा उनको प्रमोशन दिया जा रहा है।
4. क्या आदिवासियो के लिए कोई सरकार ने कोई आर्थिक संबल योजना बनाए है जिससे आदिवासी खुश हो।
5.कितने उद्योग आदिवासियो द्वारा संचालित किया जा रहा है। 
6.शहरी क्षेत्रों में  कितने आदिवासियो को सरकारी खजाने से बने मकान दुकान दिया गया  ।
7.शिक्षा , रोजगार में कोई खास स्थान दे पाए क्या।
8. 170 ख के  तहत  कितने आदिवासियो के जमीन गैर आदिवासियो से छुड़ा पाए ।
9.कितने आदिवासी अधिकारी कर्मचारी किसी भी निगम, मंडल, या मंत्रियों के निजी स्थापना में जगह दे पाए।
10.आदिवासी एजेंडे जनजाति सलाहकार परिषद पर तो चर्चा हुआ ही नही अब तक मुख्य मंत्री जी खुद ही अध्यक्ष बन बैठे है।
11.छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद का प्रतिमा स्थापित नहीं कर पाए है अब तक ।

12.महरानी वीरांगना दुर्गावती के प्रतिमा के पास कोई साज सज्जा नही दिखता ना ही सामाजिक भवन बना है। जिसके  लिया कई बार निवेदन किया गया है ।
    इनमें से कोई भी काम  ईमानदारी से किए हो तो बता दे मैं भी थोड़ा नाच लू ?
चलो इन बातो को कुछ देर के लिए भूल भी जाते है। पर आदिवासी समाज के नाम से आयोजन रखा गया कम से कम सभी स्टाल में आदिवासियो को स्थान मिलना था ।  आदिवासी नृत्य प्रतियोगिता करवाकर   केवल मनोरंजन का साधन बनाना कहा तक उचित है।
सरकार सबसे पहले माफी मांगे आदिवासी समाज से किसी भी समाज की संस्कृति प्रतियोगिता की चीज नहीं हम सब को समझना होगा। सभी देशों से आए लोगो को बराबर का सम्मान राशि दिया जाना चाहिए आप कौन  होते है यह तय करने वाले कि ये अच्छा था को वो नृत्य अच्छा था ।
आदिवासी वर्ग से संबंध रखने वाले महापुरुषों का सम्मान तो कर नहीं  पाए।
किंतु आदिवासी संस्कृति चित्र 
 जगह - जगह  चौक में चौराहों में आदिवासी कलाकृति जरूर उकेरी गई है। 
किंतु उनको ससम्मान कोई आदिवासी नाम नहीं दिया गया है गौरव पथ ही देख ले।

झारखंड के मुख्य मंत्री जी को यह पता चलता तो बुरा जरूर लगता उनके राज्य में बिरसा मुंडा जी का कितना सम्मान है वहा के बस स्टेंड, एयरपोर्ट को देख के पता चलता है।
                      आप का साथी
                योगेश कुमार ठाकुर 
                    अध्यक्ष 
           आदिवासी छात्र संगठन
           संपर्क - 9617154696

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