छत्तीसगढ़ के गाँव मा लोक-मनरंजन के पुरखौती कला नाचा-गम्मत भुइयां के सिंगार
छत्तीसगढ़ के गाँव अउ शहर मा लोक मनरंजन के पुरखौती कला नाचा-गम्मत हे. मड़ई, मेला, गणेश पक्ष, नवरात्रि , नवाखई, छट्ठी, बिहाव, गाँव बनई, जात्रा अइसने कतको मउका मा विशेष रुप ले एखर कार्यक्रम रखे जाथे
छत्तीसगढ़ के लोक मनरंजन मा नाचा के घातेच महत्तम हे. मनखे के तन अउ मन के थकास दुरिहाय बर एला बनाय गय रहिस. जब ले नाचा गम्मत चलत हे तब ले आज तक एखर देखइया के कमती नइ होइस भलुक अगरावत हे. नवा पीड़ी हा इही नाचा गम्मत ला युट्यूब मा देखथे, फेर कतको किसम के लोक मनरंजन के जिनिस टीवी, मोबाइल, इंटरनेट मा डटे रहे के पाछू नाचा गम्मत ला रतिहा अउ दिन मा घलो देखइया मन के भीड़ लग जाथे. छत्तीसगढ़ मा नाचा जेला नाच घलो कहे जाथे ।
आज के नवा पीढ़ी मन नाचा गम्मत ला भुलावत हे, हमर छत्तीसगढ के संस्कृति परंपरा हर नवा पीढ़ी के कारण नंदावत हावे । हमर संस्कृति परंपरा हर हमर पहिचान आय येला संजोके रखना बहुत जरूरी हवे ।
आज के नवा बछर मा हमर छत्तीसगढ के संस्कृति ला बचाके रखना मुसवा ले बंगाला बचाए के बरोबर हावे । आज के नवा बछर मा हमर छत्तीसगढ के संस्कृति परंपरा नाचा गम्मत ला बचाय खातिर बालोद जिला के वनांचल भुइयां के सिंगार छत्तीसगढी लोक कला नाचा पार्टी ग्राम- होच्चेटोला (मंगचुवा) के हमर छत्तीसगढ के साथी मन पूरा प्रदेश मा नाचा गम्मत करके हमर छत्तीसगढ के संस्कृति ला संजोय मा लगे हावय । मेहर जेन होच्चेटोला नाचा गम्मत के बात करत हव वो प्रदेश के अईसन नाचा आय जेन आज ले कई बछर सन 2000 ले आज तक अपन नाचा गम्मत करके छत्तीसगढ़ मा अपन अलग ही पहिचान बनाय हावे ।
आलेख साभार
रविन्द्र कुमार अमिले
ग्राम- पलान्दुर (गोटाटोला)
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