हमर संस्कृति,रीति-रिवाज हमर पहिचान

🏹🏹हमर-संस्कृति-हमर-पहचान🌳🌳
हजारों वर्ष ले हमर पुरखा मन ,हमर सियान मन अपन एक अलग पहचान बना के रखिस जेहर आज विश्व संस्कृति के हिस्सा घलो हवय,चाहे वो हमर भारत देश  अलग-अलग कोना के कोनों भी राज्य में हो, आदिवासी संस्कृति विश्व संस्कृति के जननी भी माने जाथे छत्तीसगढ़ जेखर सम्मान करना आज के "आदिवासी युवा" पीढ़ी के परम् कर्त्तव्य बनथे अऊं आज देश में हमर आदिवासी समाज के अतका झिन "महान् पुरुष" देश के आजादी बर सर्वप्रथम सर्वोपरि अपन जान के न्यौछावर करिस पर आज के भारतीय इतिहास हमर देश के वो आदिवासी वीर सपुत मन ल अनदेखा कर दिहीस,ये सब हमर शिक्षा के अभाव नहीं होय के कारण ये ,हमर आदिवासी समाज के महान् पुरुष मन 1825 ई.पुर्व से ही देश के आजादी के लड़ाई शुरू कर दें रहीस, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सर्वप्रथम शहीद गेंद सिंह,कोमाराम भीम गोंड ,अमर शहीद शंकर शाह, रघुनाथ शाह,वीर गुंडाधुर, बिरसा मुंडा,शहीद वीर नारायण सिंह सीताराम कंवर,दोरला मांझी ,बुद्धु भगत,जईसे अनेकों झन महान् पुरुष मन हमर देंश के आजादी म अपन बलिदान दिस , अऊं आज यही "महान् पुरुष"मन से आदिवासी समाज व आदिवासी युवा मन प्रेरणा लेके अपन जन्मसिद्ध अधिकार बर आगे आवत हे, अऊं अगर बात करिन हमर छत्तीसगढ़ के त आदिवासी प्रदेश होय के बावजूद "यहां के"मुलनिवासी आदिवासी"मन ऊपर लगातार ये दुनो राष्ट्रीय  पार्टी के चलते होवत हे, कभी जल जंगल जमीन ल बेचें के कोशिश त कभु आदिवासी जमीन ल लुटे के कोशिश,ओकर बावजूद आज समाज के 

वो व्यक्ति मन बदहवास होके बईठे हे जे मन "आदिवासी समाज" के परभुता बड़े बड़े पद नौकरी म बईठ के सिर्फ पके पकाय भात खावत हे,


आज प्रदेश के बाहरी आदमी मन अपन विचारधारा ल यहां के गरीब आदिवासी मन ऊपर थोप के "यहां के आदिवासी संस्कृति परंपरा ल नष्ट "करें के कोशिश करत हवय 


जेकर आभास अभी कोनों ल नई जनावत हे,
ओ दिन जनाही जेन दिन आदिवासी समाज के संस्कृति, आदिवासी मन के पहचान समाप्त हो जाही।

ओ दिन आये ले पहली अपन संस्कृति अपन परंपरा,अपन आदिवासी समाज के महान् पुरुष के सम्मान करव,


एक दिन आदिवासी समाज के संस्कृति अऊं आदिवासी समाज के महान् पुरुष"
पुनः अपन मुल स्थान म आ जाही ओ दिन छत्तीसगढ़ में आदिवासी लहर छा जाही,जय सेवा जय जोहार
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          आपका स्नेहिल
             अनिल ध्रुव
ASU (संयोजक-बिलासपुर संभाग)

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